Mahatma Gandhi Essay Hindi | महात्मा गांधी पर हिन्दी में निबंध

Mahatma Gandhi Essay Hindi आज हम आपको इस पोस्ट में देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी मोहनदास करमचंद गांधी या बापू गांधी यह तीनों नाम हमारे महात्मा गांधी जी के हैं और भी कुछ नाम से लोगों इन्हें पुकारते हैं तो चलिए इनके के बारे में कुछ जानकारी देने वाले हैं क्योंकि

अगर मैं बापू जी के बारे में लिखने बैठू तो सदियां गुजर जाएगी पर बापू जी की कहानियां पूरी नहीं होगी आज इस पोस्ट में मैं आपको कुछ महत्वपूर्ण तथ्य और महत्वपूर्ण जानकारियां शेयर करने वाला हूं इस पोस्ट को पूरा ध्यान पूर्वक पढ़ना आपको बापू जी के बारे में बहुत अच्छा जानने को मिलेगा

बापू जी ने हमारे देश को आजाद करवाने के लिए अनेकों लड़ाइयां लड़ी पर हथियार नहीं उठाया और अंग्रेजों को अपनी लाठी के दम पर ही देश छोड़ने को मजबूर कर दिया तो दोस्तों जानते हैं महात्मा जी के जीवन के बारे में

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Mahatma Gandhi Father गाँधी जी के पिता के बारे में

महात्मा गांधी जी के दादाजी का नाम उत्तमचंद गांधी था जो पोरबंदर में रहते थे राजनीतिक खटपट के कारण उन्होंने पोरबंदर छोड़ दिया और जूनागढ़ राज्य में आकर बस गए थे एक बार उत्तमचंद गांधी ने जूनागढ़ के नवाब को बाएं हाथ से सलाम किया तो किसी ने उनसे पूछा कि इसका कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि उनका दाहिना हाथ दो पोरबंदर को अर्पित कर दिया है अब दूसरा हाथ बचा है जिससे मैंने जूनागढ़ के नवाब को सलाम किया है |

उत्तमचंद गांधी को ओता गांधी कहते थे इनकी दो शादियां हुई थी पहली शादी से इनको 4 लड़के हुए थे और दूसरी शादी से दो लड़के हुए थे इनमें से पांचवें नंबर पर करमचंद गांधी आते हैं जिन्हें पहले कब्बा गांधी कहा जाता था और सबसे आखरी के लड़के का नाम तुलसीदास गांधी था इन दोनों भाइयों ने बारी बारी से पोरबंदर में दीवान का काम किया कबा गांधी अथवा करमचंद गांधी महात्मा गांधी जी के पिताजी थे |

करमचंद गांधी की भी चार शादियां हुई थी जिनके अंतिम पत्नी का नाम पुतलीबाई था पुतलीबाई को एक लड़की और 3 लड़के को जन्म दिया जिनमें से सबसे आखिरी महात्मा गांधी जी थे महात्मा गांधी जी के पिता करमचंद गांधी कुटुंब प्रेमी सत्यप्रिया सूर उद्धार तथा क्रोधी थे |

और राज्य के प्रति बहुत वफादार थे एक बार राज्य के किसी साहब ने राजकोट के ठाकुर साहब का अपमान कर दिया तो इस पर करमचंद गांधी ने उनका विरोध किया करमचंद गांधी की इस बात से साहब नाराज हो गए और गांधी जी को माफी मांगने के लिए कहा पर करमचंद गांधी ने माफी मांगने से इनकार कर दिया इस कारण से महात्मा गांधी के पिता जी को कुछ समय के लिए जेल में रहना पड़ा इस पर भी वह डिगे नहीं तो अंत में साहब ने उन्हें छोड़ देने का आदेश दे दिया |

Mahatma Gandhi Mother

महात्मा गांधी जी की माता पुतली बाई एक साध्वी स्त्री थी जो बिना पूजा पाठ किए भोजन तक नहीं करती थी और हमेशा वैष्णो मंदिर जाती थी और कठिन से कठिन व्रत रखती थी बीमार होने पर भी व्रत नहीं छोड़ती थी और वह शाम को सूर्य को देखकर व्रत खोलती थी चोमासे के महीने में जब सूर्य दिखाई नहीं देता कम दिखाई देता है तो ऐसे समय में अगर शाम को सूर्य दिखाई नहीं देता तो पुतलीबाई भूखी ही सो जाती थी और कहती थी कोई बात नहीं आज भाग्य में भोजन नहीं है |

Mahatma Gandhi Jayanti in hindi

महात्मा गांधी जी का जन्म भादो वेदी बारस के दिन 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर अथवा सुदामपुरी में हुआ था इनका बचपन का नाम मोहनदास करमचंद गांधी था महात्मा गांधी जी का बचपन पोरबंदर में ही बीता महात्मा गांधी जी एक साधारण श्रेणी के विद्यार्थी थे ग्राम पाठशाला से हाईस्कूल तक पहुंचने के लिए 12 वर्ष लग गए थे बापूजी को दूसरी कक्षा के बाद इनाम मिलने लगे पांचवी तथा छठी कक्षा में प्रति मास 4 और ₹10 की छात्रवृत्ति मिलने लगी महात्मा गांधी जी ने सच्चाई और बलिदान के प्रतीक प्रह्लाद और हरिश्चंद्र जी को आदर्श के रूप में अपनाया |

Mahatma Gandhi Wife  

गांधी जी की 13 वर्ष की आयु में शादी हो गई थी अपनी पत्नी का नाम कस्तूरबा बाई था कस्तूरबाई सीधी स्वतंत्र और मेहनती सित्री थी

महात्मा गाँधी के पिता की देहांत

गांधी जी जब 16 बरस के थे तब इनके पिताजी करमचंद गांधी जी को भगंदर की बीमारी हो गई बापूजी ने अपने पिताजी की एक नर्स की तरह खूब सेवा की उन्होंने उनके घाव दोहे उनमें दवा डाली मरहम लगाए उन्हें समय पर दवाई पिलाई और रात को हमेशा उनके पैर दबाए कुछ समय बाद करमचंद गांधी गुजर गए |

गाँधी जी कोलेज में

1887 ते में मोहन दास ने मुंबई यूनिवर्सिटी से मैट्रिक की परीक्षा पास की और उसके बाद भावनगर के कॉलेज रामलदास कॉलेज में दाखिला लिया इस कॉलेज में गुजराती भाषा में पढ़ाया जाता था इसलिए गांधी जी को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा इसी बीच में गांधी जी के परिवार में उनके भविष्य को लेकर बातें हो रही थी कि गांधीजी का सपना है डॉक्टर बनने का तो उनके ऊपर ही निर्णय छोड़ा जाए पर वैष्णव परिवार के अंदर चिरफाड की इजाजत नहीं दी जाती इसके साथ ही अगर गुजरात में किसी राजघराने में ऊंचे पद पर कार्य करना है तो उसके लिए बैरिस्टर बनना पड़ेगा इसलिए गांधी जी को इंग्लैंड जाना पड़ा

गांधी जी का मन रामलदास कॉलेज में नहीं लग रहा था इसलिए उन्होंने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया और इंग्लैंड जाने की तैयारी कर ली

Mahatma Gandhi Ke Bare Mein इंग्लैंड में गांधी जी  

September 1888 मैं वह लंदन पहुंच गए और वहां जाकर कानूनन महाविद्यालय में एक एंटर टेंपल में दाखिल हो गए

ट्रांसवाल सरकार ने 1906 में दक्षिण अफ्रीका की भारतीय जनता के पंजीकरण के लिए अपमानजनक अध्यादेश जारी किए इसलिए भारतीयों ने सितंबर 1906 जोहांसबर्ग में गांधी जी के साथ एक विरोध जनसभा का आयोजन किया गया और इन आध्यदेशों का उल्लंघन इतने परिणामस्वरूप दंड भुगतने की शपथ ली इन कारणों से सत्याग्रह का जन्म हुआ |

दक्षिण अफ्रीका में 7 साल से ज्यादा समय तक यह संघर्ष चला और इस समय काफी उतार-चढ़ाव आते रहे पर गांधीजी भारतीय अल्पसंख्या और समुदाय सक्तिशाली प्रतिपक्षियों के खिलाफ संघर्ष जारी रखा हजारों भारतीयों ने अपने स्वाभिमान को चोट पहुंचाने वाले कानून के सामने झुकने की बजाए स्वतंत्रता की बलि चढ़ना पसंद किया |

महात्मा गांधी जब भारत लौट आए

गांधीजी सन 1914 ईस्वी में भारत लौट आए भारत में गांधी जी का भव्य स्वागत किया गया और उन्हें महात्मा नाम से पुकारना शुरू कर दिया गांधी जी ने 4 वर्ष तक भारत की स्थिति का अध्ययन किया और उन लोगों को तैयार किया जो लोग सत्याग्रह के द्वारा भारत में प्रचलित सामाजिक व राजनीतिक बुराइयों को हटाने में उनका साथ दे सके |

गांधी जी ने फरवरी 1919 में अंग्रेजों का विरोध किया जो अंग्रेजों द्वारा एक कानून बनाया गया था रॉयल एक्ट कानून इस कानून की वजह से किसी भी व्यक्ति को बिना मुकदमा चलाए जेल भेजा जा सकता था तब गांधी जी ने सत्याग्रह आंदोलन की घोषणा कर दी थी इस आंदोलन के परिणाम स्वरूप राजनीति में एक ऐसा भूचाल आया जिसने 1919 ईसवी पूरे महाद्वीप को झाकझोर दिया |

इस आंदोलन की सफलता से गांधी जी ने सीख ली और स्वतंत्रता के लिए अनेक अभियान चलाएं जैसे नागरिक अवज्ञा आंदोलन, भारत छोड़ो आंदोलन, असहयोग आंदोलन, दांडी यात्रा इन सभी आंदोलनों के प्रयासों से भारत 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ |

महात्मा गांधी जी की मृत्यु

महात्मा गांधी जी ने जिस प्रकार शांति और अहिंसा के रास्ते पर चलकर अंग्रेजों को भारत से भगाया इसका कोई दूसरा उदाहरण आपको देखने को नहीं मिलेगा इसलिए संयुक्त राष्ट्र संघ ने सन 2007 में गांधी जयंती को विश्व अहिंसा दिवस के रूप में मनाए जाने की घोषणा कर दी |

महात्मा गांधी मोहनदास करमचंद गांधी भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक प्रमुख राजनीतिक आध्यात्मिक नेता थे जिनकी मृत्यु 30 जनवरी 1948 ईस्वी को दिल्ली के बिड़ला भवन में नाथूराम गॉडसे द्वारा गोली मारकर कर दी गई थी |

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अंतिम शब्द :

दोस्तों आज mahatma gandhi essay hindi इस पोस्ट में हमने आपको राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के जीवन से परिचय करवाया mahatma gandhi ke bare mein अगर इस पोस्ट को लिखने में कोई कमी रह गई है  तुम मुझे माफ करना क्योंकि मैंने यह सब जानकारी इंटरनेट से इकट्ठा करके आपके लिए लेकर आया हूं और इस पोस्ट के अंदर कुछ ऐसा है जो बदलने लायक है कुछ इस पोस्ट में जोड़ने लायक है mahatma gandhi jayanti in hindi तो आप हमें कमेंट करके जरूर बताएं हम आपके द्वारा दिए गए सुझाव इस पोस्ट में जोड़ने की कोशिश करेंगे मिलते हैं दोस्तों एक नई पोस्ट में तब तक के लिए धन्यवाद |

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